हरितालिका तीज व्रत (भाद्रपद शुक्ल पक्ष)
हरितालिका तीज व्रत
“मुहूर्त्तमात्र सत्वेऽपि दिने गौरीव्रतं परेति”
अर्थात् – माधवोक्त जिस दिन केवल एक मुहूर्त भी तृतीया हो उस दिन परायुक्ता तृतीया में हरितालिका व्रत करना चाहिये।
हरतालिका तीज व्रत भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव व माता पार्वती की रेत के द्वारा बनाई गई अस्थाई मूर्तियों को पूजती हैं व सुखी वैवाहिक जीवन तथा संतान की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करती हैं।
हरतालिका तीज की उत्पत्ति व इसके नाम का महत्त्व एक पौराणिक कथा में मिलता है। हरतालिका शब्द, हरत व आलिका से मिलकर बना है, जिसका अर्थ क्रमशः अपहरण व स्त्रीमित्र (सहेली) होता है।
हरतालिका तीज की कथा के अनुसार, पार्वतीजी की सहेलियां उनका अपहरण कर उन्हें घने जंगल में ले गई थीं। ताकि पार्वतीजी की इच्छा के विरुद्ध उनके पिता उनका विवाह भगवान विष्णु से न कर दें।
हरतालिका पूजा के लिए सुबह का समय उचित माना गया है। यदि किसी कारणवश प्रातःकाल पूजा कर पाना संभव नहीं है है तो प्रदोषकाल में शिव-पार्वती की पूजा की जा सकती है। तीज की पूजा प्रातः स्नान के पश्चात् नए व सुन्दर वस्त्र पहनकर की जाती है। रेत से बनी शिव-पार्वती की प्रतिमा का विधिवत पूजन किया जाता है व हरतालिका व्रत कथा को सुना जाता है।
कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश व तमिलनाडु में हरतालिका तीज को गौरी हब्बा के नाम से जाना जाता है व माता गौरी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण दिन के रूप में पूजा जाता है। गौरी हब्बा के दिन महिलाएं स्वर्ण गौरी व्रत रखती हैं व माता गौरी से सुखी वैवाहिक जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं।
तीज का त्यौहार मुख्यतः उत्तर भारतीय महिलाओं द्वारा धूमधाम से मनाया जाता है। तीज मुख्यतः राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखण्ड में मनाई जाती है। सावन (श्रावण) और भादव (भाद्रपद) के मास में आने वाली तीन प्रमुख तीज निम्न हैं:
• हरियाली तीज
• कजरी तीज
• हरतालिका तीज
उपरोक्त तिजों के अतिरिक्त अन्य प्रमुख तीज निम्न है- आखा तीज, जिसे अक्षय तृतीया भी कहते है और गणगौर तृतीया (गणगौर) है।
हरतालिका तीज व्रत भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाया जाता है। हरतालिका तीज हरियाली तीज के एक मास बाद आती है व मुख्यतः गणेश चतुर्थी के एक दिन पहले मनाई जाती है। इस दिन महिलाएं शिव-पार्वती की मिट्टी से बनी प्रतिमा की पूजा-अर्चना करती हैं।
हरतालिका तीज का व्रत महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। अविवाहित लड़कियां भी मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। हरतालिका तीज, भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का उत्सव है, और इस दिन उनकी पूजा-अर्चना करने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है
॥ श्रीरस्तु ॥
༺❀༻
«« संकलनकर्ता »»
पंडित हर्षित द्विवेदी
(‘हरि हर हरात्मक’ ज्योतिष)
┉┅━❀❀⚝❀❀━┅┉
Share this content:



Post Comment