जन्म कुण्डली में दिवालियापन योग

Bankruptcy Yoga in Birth Chart Hari Har Haratmak

꧁❀“ॐ हरि हर नमो नमःॐ”❀꧂

दिवालियापन योग

अष्टमेश ४१५।९।१० स्थानों में हो और लग्नेश निर्बल हो तो जातक दिवालिया होता है। योगकारक ग्रह के ऊपर राहु एवं रवि की दृष्टि पड़ने से योग अधूरा रह जाता है। लाभेश व्यय में हो या भाग्येश और दशमेश व्यय में हों तो दिवालिया होता है। यदि पंचम में शनि तुलाराशि का हो तो भी यह योग बनता है। द्वितीयेश ९।१०।११ भावों में हो तो दिवालिया योग होता है, परन्तु द्वितीयेश गुरु के दशम और मंगल के एकादश भाव में रहने से यह योग खण्डित हो जाता है। लग्नेश वक्री होकर ६।८।१२वें भाव में स्थित हो तो भी जातक दिवालिया होता है।

॥ श्रीरस्तु ॥
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श्री हरि हरात्मक देवें सदा, मुद मंगलमय हर्ष।
सुखी रहे परिवार संग, अपना भारतवर्ष॥
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┉ संकलनकर्ता ┉
श्रद्धेय पंडित विश्‍वनाथ प्रसाद द्विवेदी
‘सनातनी ज्योतिर्विद’
संस्थापक, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक
(‘हरि हर हरात्मक’ ज्योतिष)
संपर्क सूत्र – 07089434899
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Pandit Vishwanath Dwivedi is active, expressive, social, interested in many things. Pandit Vishwanath Dwivedi has more than 8 years of executive experience in the field of Astrology.

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