अक्षय तृतीया – आखा तीज

꧁❀“ॐ हरि हर नमो नमःॐ”❀꧂

अक्षय तृतीया

वैशाख शुक्ल तृतीया अक्षया तृतीयोच्यते ।
सा पूर्वान्ह व्यापिनी ग्राह्या ॥१॥ (निर्णय सिन्धु)

भावार्थ – जिस दिन पूर्वान्हकाल में वैशाख शुक्ल तृतीया हो उस समय अक्षय तृतीया पर्व होता है।

द्वेधाविभक्तदिन पूर्वाद्धकदेश व्यापिनीदिनद्वये।
चेत्त्रिमुहूर्तधिक व्याप्ति सत्ये परा॥२॥ (धर्म सिन्धु)

भावार्थ – यदि तृतीया दोनों दिन पूर्वान्हकाल में ही तो ६ घटी से अधिक व्याप्त की स्थिति में दूसरे दिन लें और यदि कम हो तो पहले दिन ही तृतीया पर्व होता है।

अक्षय तृतीया पर्व का महत्व

अक्षय तृतीया जिसे आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू समुदायों के लिए अत्यधिक शुभ और पवित्र दिन है। यह वैशाख माह में शुक्ल पक्ष तृतीया के दौरान पड़ता है। बुधवार के साथ रोहिणी नक्षत्र वाले दिन पड़ने वाली अक्षय तृतीया को बहुत शुभ माना जाता है। अक्षय (अक्षय) शब्द का अर्थ कभी कम न होने वाला होता है। इसलिए इस दिन कोई भी जप, यज्ञ, पितृ-तर्पण, दान-पुण्य करने का लाभ कभी कम नहीं होता और व्यक्ति को सदैव मिलता रहता है।

ऐसा माना जाता है कि अक्षय तृतीया सौभाग्य और सफलता लाती है। अधिकांश लोग इस दिन सोना खरीदते हैं क्योंकि ऐसा माना जाता है कि अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने से आने वाले भविष्य में समृद्धि और अधिक धन मिलता है। अक्षय दिन होने के कारण ऐसा माना जाता है कि इस दिन खरीदा गया सोना कभी कम नहीं होगा और बढ़ता या बढ़ता रहेगा।

अक्षय तृतीया का दिन भगवान विष्णु द्वारा शासित होता है जो हिंदू त्रिमूर्ति में संरक्षक भगवान हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रेता युग की शुरुआत अक्षय तृतीया के दिन हुई थी। आमतौर पर अक्षय तृतीया और भगवान विष्णु के छठे अवतार की जयंती, परशुराम जयंती एक ही दिन पड़ती है, लेकिन तृतीया तिथि के आरंभिक समय के आधार पर, परशुराम जयंती अक्षय तृतीया के दिन से एक दिन पहले पड़ सकती है।

वैदिक ज्योतिषी भी अक्षय तृतीया को सभी अशुभ प्रभावों से मुक्त एक शुभ दिन मानते हैं। हिंदू चुनावी ज्योतिष के अनुसार तीन चंद्र दिवस, युगादि, अक्षय तृतीया और विजय दशमी को किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने या करने के लिए किसी मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि ये तीन दिन सभी अशुभ प्रभावों से मुक्त होते हैं।

॥ श्रीरस्तु ॥
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श्री हरि हरात्मक देवें सदा, मुद मंगलमय हर्ष।
सुखी रहे परिवार संग, अपना भारतवर्ष॥
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┉ संकलनकर्ता ┉
श्रद्धेय पंडित विश्‍वनाथ प्रसाद द्विवेदी
‘सनातनी ज्योतिर्विद’
संस्थापक, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक
(‘हरि हर हरात्मक’ ज्योतिष)
संपर्क सूत्र – 07089434899
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Pandit Vishwanath Dwivedi is active, expressive, social, interested in many things. Pandit Vishwanath Dwivedi has more than 8 years of executive experience in the field of Astrology.

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